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Wednesday, August 22, 2012

जीवन की भट्टी में



जीवन की भट्टी में मन
अब तेज़ आंच
पर चढी कढाई सा
हो गया है
विचार इस हद तक
उबलने लगे हैं
सब्र का पानी उफन रहा है
सब कुछ अस्त व्यस्त
करने के कगार पर
बेताबी से खडा है
इतनी उथल पुथल अब
ह्रदय से सही नहीं जाती
जिधर भी दृष्टि उठाता हूँ
सिवाय तनाव के
कुछ नज़र नहीं आता
ठहाके लगाते लोग,
बाहों में बाहें डाले दोस्त
अब गिद्ध जैसे
लुप्त होते जा रहे
इर्ष्या-द्वेष ,होड़ का राक्षस
अट्टाहास कर रहा
शोर भरे जीवन में
लगने लगा है
अपने पराये में कोई
फर्क नहीं रहा
कोई किसी को सुनना
समझना नहीं चाहता
अपनी अपनी तूतीं
बजाना चाहता
निरंतर स्वार्थ में जीता
अहम् को
सफल जीवन का सूत्र
समझता
21-08-2012
663-23-08-12

ज़िन्दगी को समझने के लिए



ज़िन्दगी को
समझने के लिए
खुशी के साथ गम भी
ज़रूरी है
हँसी के साथ आंसू भी
ज़रूरी है
जीत के साथ हार भी
ज़रूरी है
क्रोध के साथ प्यार भी
ज़रूरी है
हर जान को
एक जान का साथ भी
ज़रूरी है
इंसान बन कर रहना भी
ज़रूरी है
ऊपर वाले की दुआ भी
ज़रूरी है
जिसने भी समझ लिया
सच ज़िन्दगी का
उसने ही समझ लिया
ज़िन्दगी को
उसको फ़िक्र करना फिर
ज़रूरी नहीं है
13-08-2012
656-16-08-12

चिंतन ,मनन के बाद !



रात भर सो नहीं पाया
विचारों से व्यथित होता रहा
किसी तरह आँख लगी ही थी
कानों में चिड़ियों की
चहचाहट सुनायी पड़ने लगी
सवेरे का उजाला ,
धूप की किरनें
मेरे कमरे में आने लगी
मेरे पास दो ही उपाय हैं
करने के लिए
या तो खिड़कियाँ खोल दूं
पर्दों को पूरी तरह हटा दूं
कमरे को ताज़ी हवा,
भरपूर उजाले से भर दूं
खुद भी प्रफुल्लित,
उल्लासित महसूस करूँ,
मन की चिंता भूल कर
अपने काम पर चल पडूँ
या फिर पर्दों को पूरी तरह
खींच दूं ,
उजाले और हवा को
कमरे में आने ही ना दूं
चादरओढ़ कर,आँख बंद कर
फिर अँधेरे में लौट जाऊं
खुद को व्यथित करूँ ?
मन की पीड़ा को बढाऊँ?
चिंतन मनन के बाद
निश्चित कर लिया
अवसाद के झंझावत में
नहीं फसूँगा
फल मिले ना मिले
कर्म करता रहूँगा,
हर्षोल्लास पाने का
प्रयत्न नहीं छोडूंगा
13-08-2012
655-15-08-12

पवित्र रिश्ते को केवल धागे से मत जोड़ो



पवित्र रिश्ते को केवल
धागे से मत जोड़ो
थोड़ा सा आगे बढ़ो
त्योंहार के पहले ही
त्योंहार मनाओ
हर दिन को रक्षाबंधन
समझो
जिससे रिश्ता नहीं कोई
उसे भी बहन कह दो
निरंतर उसकी रक्षा का
प्रण कर लो
तुमसे मांगे मदद
उससे पहले ही
आवश्यकता पूछ लो
पवित्र रिश्ते को नाम
ना दो
उसे स्नेह विश्वास से
जी लो
05-08-2012
652-12-08-12

ना तुम्हारी जीत ज़रूरी ,ना मेरी हार ज़रूरी



ना तुम्हारी जीत ज़रूरी
 ना मेरी हार ज़रूरी दिलों में नज़दीकी ज़रूरी मैं हार भी जाऊं पर दिल से नहीं लगाऊँ तुम जीत भी जाओ गर सर पर ना चढाओ
अहम् से ना भर जाओ
दिल आपस में वैसे ही मिलते रहेंगे ना इक दूजे से यकीन उठेगा
ना दिलों में फासला बढेगा
मुझे हार में भी जीत का मज़ा मिलेगा
तुम जीत कर भी दिल हार जाओगे
03-08-2012
649-09-08-12

मुझे तो मार दोगे



मुझे तो मार दोगे
पर अपनी फितरत को
कैसे मारोगे ?
कैसे अपनी नफरत को
मारोगे?
तुम कैसे बच पाओगे ?
खुदा के उसूलों को
याद कर लो 
ना किसी हथियार की
ज़रुरत
ना ही किसी ज़हर की
नफरत से भरी तुम्हारी
फितरत ही काफी है
तुम्हें दुनिया से उठाने
के लिए
21-08-2012
669-29-08-12

अहम् पर कविता -हार किसी को मंज़ूर नहीं



चार दिनों का
सब्र भी नहीं किसी को
पल पल भारी लगता
जीवन का
जब अहम् हो गया
जान से प्यारा 
क्या करना फिर
दोस्त और दोस्ती का
जो भी
रह गया होड़ में पीछे
वही हारा कहलाता
हार किसी को मंज़ूर नहीं
क्या अपना क्या पराया
प्यार मोहब्बत गए भाड़ में
हर इंसान
फिर दुश्मन लगता
21-08-2012
673-33-08-12,

Tuesday, June 26, 2012

निरंतर कह रहा .......: मेरी आत्मा

निरंतर कह रहा .......: मेरी आत्मा: शरीर की कितनी पडतों के नीचे दबी है मेरी आत्मा मुझे पता नहीं शरीर में कहाँ छुपी है मेरी आत्मा मुझे पता नहीं इतना अवश्य पता...

Monday, June 25, 2012

निरंतर कह रहा .......: क्यों कहते,तुम अकेले हो

निरंतर कह रहा .......: क्यों कहते,तुम अकेले हो: क्यों कहते,तुम अकेले हो किसी के साथ कोई नहीं होता तुम कहते तुम अकेले हो हर तरह के इंसान मिलते जीवन में जो हँसाते भी हैं रुल...

निरंतर कह रहा .......: कौन कहता है?, आग पानी का साथ नहीं हो सकता

निरंतर कह रहा .......: कौन कहता है?, आग पानी का साथ नहीं हो सकता: कौन कहता है ? आग पानी का साथ नहीं हो सकता मैं सबूत हूँ नफरत भरे रिश्तों की आग में भी जीवित रहा समस्याओं की कसौटी पर खरा उतर...

निरंतर कह रहा .......: कितनी नाव,कितने मांझी बदलोगे

निरंतर कह रहा .......: कितनी नाव,कितने मांझी बदलोगे: कितनी नाव कितने मांझी बदलोगे कितने दोस्त कितने साथी बदलोगे अब अपनी इस फितरत को विराम मचलते मन को विश्राम दे दो ज़िन्द...

निरंतर कह रहा .......: इच्छाओं की कस्तूरी

निरंतर कह रहा .......: इच्छाओं की कस्तूरी: इच्छाओं की कस्तूरी मनमोहिनी सुगंध से मुझे निरंतर लुभाती संतुष्टी के पथ से डिगाने का निष्फल प्रयत्न करती मेरे संयम की बार बा...

निरंतर कह रहा .......: पुराने हो गए हैं,तो क्या बदल दोगे

निरंतर कह रहा .......: पुराने हो गए हैं,तो क्या बदल दोगे: पुराने हो गए हैं तो क्या बदल दोगे कूडा समझ कर फैंक दोगे ये भी तो सोच लो नया कहाँ से लाओगे तुम कह दोगे नए की ज़रुरत ही नहीं...

Tuesday, June 5, 2012

निरंतर कह रहा .......: खाई है चोट अगर

निरंतर कह रहा .......: खाई है चोट अगर: खाई है चोट अगर तो रोते क्यूं हो फिर ना भुगतो दोबारा कुछ ऐसा करो जहन के दरवाज़े खुले रखो खुद भी अन्दर झाँक कर देख लो क...

निरंतर कह रहा .......: हर हाल में संतुष्ट रहते

निरंतर कह रहा .......: हर हाल में संतुष्ट रहते: गोधुली वेला में गाँव की सड़क पर शहर की ओर अग्रसर था गाय बैलों का रेवड़ गाँव की तरफ लौट रहा था पैरों से उडी धूल ने नाक आँख...

निरंतर कह रहा .......: राह मुश्किल हो गयी तो क्या चलना बंद कर दूं

निरंतर कह रहा .......: राह मुश्किल हो गयी तो क्या चलना बंद कर दूं: राह मुश्किल हो गयी तो क्या चलना बंद कर दूं गिर गया तो क्या उठूँ नहीं जो चलेगा वही तो गिरेगा उठेगा नहीं तो मंजिल पर ...

निरंतर कह रहा .......: दिल जीतने के लिए

निरंतर कह रहा .......: दिल जीतने के लिए: मीठी बातें मुस्कराता चेहरा ही काफी नहीं होता किसी को लुभाने के लिए साथ हँसना पड़ता साथ रोना पड़ता विश्वास जीतने के लिए लेन...

निरंतर कह रहा .......: मैं अनपढ़ ही ठीक हूँ

निरंतर कह रहा .......: मैं अनपढ़ ही ठीक हूँ: मैं कभी स्कूल नहीं गया किताब का एक अक्षर भी कभी नहीं पढ़ा लोगों को बोलते देखा जो अच्छा लगा उसका अनुसरण कर लिया जो अच्छा नह...

Monday, June 4, 2012

निरंतर कह रहा .......: मैं अनपढ़ ही ठीक हूँ

निरंतर कह रहा .......: मैं अनपढ़ ही ठीक हूँ: मैं कभी स्कूल नहीं गया किताब का एक अक्षर भी कभी नहीं पढ़ा लोगों को बोलते देखा जो अच्छा लगा उसका अनुसरण कर लिया जो अच्छा नह...

Sunday, June 3, 2012

निरंतर कह रहा .......: बहुत कुछ सहना होता है ,दिल जीतने के लिए

निरंतर कह रहा .......: बहुत कुछ सहना होता है ,दिल जीतने के लिए: मीठी बातें मुस्कराता चेहरा ही काफी नहीं होता किसी को लुभाने के लिए साथ हँसना पड़ता साथ रोना पड़ता विश्वास जीतने के लिए ल...

निरंतर कह रहा .......: कैसे हाँ कहूँ ? जब ना कहना चाहता हूँ ?

निरंतर कह रहा .......: कैसे हाँ कहूँ ? जब ना कहना चाहता हूँ ?: कैसे हाँ कहूँ ? जब ना कहना चाहता हूँ ? पर ना भी कैसे कहूँ ? समझ नहीं पाता हूँ झंझावत में फंसा हूँ रिश्तों के बिगड़ने का खौफ दु...

निरंतर कह रहा .......: सब आँखें बंद कर चल रहे हैं

निरंतर कह रहा .......: सब आँखें बंद कर चल रहे हैं: सब आँखें बंद कर चल रहे हैं फिर भी गिरने से डर रहे हैं सुकून की तलाश में नफरत के शोले भड़का रहे हैं काँटों की डगर क...

निरंतर कह रहा .......: ये कैसी ज़िन्दगी?

निरंतर कह रहा .......: ये कैसी ज़िन्दगी?: ये कैसी ज़िन्दगी? जिसमें रंग नहीं खुशी नहीं  गले मिल कर हँसना नहीं मिलजुल कर रहना नहीं कल क्या होगा? कल क्या करना है? ...

निरंतर कह रहा .......: घर की खामोशी

निरंतर कह रहा .......: घर की खामोशी: घर की खामोशी हर पल दिल को चीरने लगी आपस में कलह साफ़ दिखने लगी सुबह को ही शाम होने लगी एक दूसरे पर ऊंगली उठने लगी प...

निरंतर कह रहा .......: उजड़ गयी जब फसल सारी

निरंतर कह रहा .......: उजड़ गयी जब फसल सारी: उजड़ गयी जब फसल सारी तुम पूछते खलिहान कहाँ है बिखर चुका जब परिवार सारा तुम पूछते घर कहाँ है खुद गए रास्ते में गडडे अब...

निरंतर कह रहा .......: आज फिर ज़ख्म हरे हो गए

निरंतर कह रहा .......: आज फिर ज़ख्म हरे हो गए: आज फिर ज़ख्म हरे हो गए वो हमारे सामने से निकल गए देख कर भी अनदेखा कर गए अपनी तंगदिली पर मोहर लगा गए ये ज़रूरी नहीं है ...

Tuesday, May 29, 2012

निरंतर कह रहा .......: माँ ही जननी,माँ ही पोषक

निरंतर कह रहा .......: माँ ही जननी,माँ ही पोषक: माँ ही जननी माँ ही पोषक माँ ही रक्षक माँ ही पथ प्रदर्शक माँ स्नेह   सरिता माँ करूणा का सागर माँ का आशीष पारस मणी माँ ...

निरंतर कह रहा .......: सृजन और विध्वंस

निरंतर कह रहा .......: सृजन और विध्वंस: किस्मत मिट्टी की अच्छी या खराब निर्भर करेगा उस पर जिसके के हाथों में जायेगी मिट्टी जिसकी जैसी नियत वैसा ही करेगा वो एक बनाए...

निरंतर कह रहा .......: क्रोध पर कविता -मैं नहीं कहता तुम मेरी मानो

निरंतर कह रहा .......: क्रोध पर कविता -मैं नहीं कहता तुम मेरी मानो: मैं नहीं कहता तुम मेरी मानो पर ध्यान से सुन तो लो मुझे प्रतीत होता है तुम्हें क्रोध बहुत आता है आवेश में जो नहीं कहना चाहि...

निरंतर कह रहा .......: खुदा से पूछा मैंने एक दिन

निरंतर कह रहा .......: खुदा से पूछा मैंने एक दिन: खुदा से पूछा मैंने एक दिन क्यूं ज़मीं पर बसेरा नहीं बसाया उसने खुदा ने जवाब दिया इंसान के दिल से नफरत साफ़ करते करते छा...

निरंतर कह रहा .......: भ्रूण ह्त्या पर कविता-मुझे जन्म तो लेने दो

निरंतर कह रहा .......: भ्रूण ह्त्या पर कविता-मुझे जन्म तो लेने दो: मुझे जन्म तो लेने दो संसार को देखने तो दो वैसे ही बहुत कुछ सहना होगा लपलपाती नज़रों से खुद को बचाना होगा पुरुषों का तिरिस्कार...

निरंतर कह रहा .......: लक्ष्य की और

निरंतर कह रहा .......: लक्ष्य की और: कोई हाथ पकड़ता है कोई पैर खींचता है कोई बातों से विचलित करने की कोशिश तो कोई अवरोध खड़े करता हैं चारों तरफ से मुझे पथ से ...

निरंतर कह रहा .......: कौन कहता है ऊंचे पहाड़ों पर घास के मैदान नहीं होते...

निरंतर कह रहा .......: कौन कहता है ऊंचे पहाड़ों पर घास के मैदान नहीं होते...: कौन कहता है ऊंचे पहाड़ों पर घास के मैदान नहीं होते ऊंचे लोग धरातल से जुड़े नहीं होते हुए हैं इस देश में नेता गाँधी , सुभाष प...

निरंतर कह रहा .......: बिना भावनाओं के जीवन

निरंतर कह रहा .......: बिना भावनाओं के जीवन: कोई पंछी ना उड़ता सितारा ना जगमगाता चाँद बादलों के पीछे छुपा रहता सूरज कभी ना उगता तो आकाश को कौन पूछता विशाल और विस्त...

निरंतर कह रहा .......: कैक्टस

निरंतर कह रहा .......: कैक्टस: अनंत काल से कालजयी मुस्कान लिए मरुधर में निश्चल खडा हूँ   धूल भरी आँधियों से अकेला लड़ रहा हूँ   लड़ते हुए भी हरीतिमा का ...

Saturday, May 12, 2012

उस से नाम पूछा ,उसने बता दिया

उस से नाम पूछा
उसने बता दिया
माँ,बाप का नाम पूछा
चुप रहा
जाती, धर्म पूछा
चुप रहा
गाँव,शहर पूछा
चुप रहा
फिर धीरे से बोला
आज तक किसी से
कहा नहीं
आज तुमको कहता  हूँ
नफरत किसी से
रखता नहीं
धरती को माँ,
देश को पिता,
इंसानियत को धर्म
मानता हूँ
अनाथ होते हुए भी
खुद को अनाथ नहीं
मानता हूँ
इंसान की जात हूँ
सम्मान से जीता हूँ
निरंतर यही पैगाम
देता हूँ
20-01-2001

Sunday, May 6, 2012

निरंतर कह रहा .......: कुंठा की अभिव्यक्ती

निरंतर कह रहा .......: कुंठा की अभिव्यक्ती: प्रेम , प्यार , मोहब्बत तुम कहते हो खामोश रहूँ  आंसू ना बहाऊँ भावनाओं को खुले आम ना दर्शाऊँ तो , क्या ग़मों को पीता रहूँ उनका...

Wednesday, May 2, 2012

निरंतर कह रहा .......: सृजन और विध्वंस

निरंतर कह रहा .......: सृजन और विध्वंस: किस्मत मिट्टी की अच्छी या खराब निर्भर करेगा उस पर जिसके के हाथों में जायेगी मिट्टी उसकी जैसी नियत वैसा ही करेगा वो एक ब...

निरंतर कह रहा .......: झूठ का आवरण

निरंतर कह रहा .......: झूठ का आवरण: किसी ने तुम्हारे प्रशंसा में दो मीठे शब्द बोल दिए , तुम पचा नहीं पाए फूल कर कुप्पा गए बिना यह सोचे समझे कहने वाले का मंतव्य क्या था क्या व...

निरंतर कह रहा .......: क्रोध पर कविता -मैं नहीं कहता तुम मेरी मानो

निरंतर कह रहा .......: क्रोध पर कविता -मैं नहीं कहता तुम मेरी मानो: मैं नहीं कहता तुम मेरी मानो पर ध्यान से सुन तो लो मुझे प्रतीत होता है तुम्हें क्रोध बहुत आता है आवेश में जो नहीं कहना चाहि...

निरंतर कह रहा .......: जी का वन ही तो जीवन है

निरंतर कह रहा .......: जी का वन ही तो जीवन है: जीवन के सृजन कर्ता से पूछा मैंने एक दिन क्यों आपने संसार में सांस लेने वालों का नाम जीव रखा वो मुस्कारा कर बोला जी का व...

Friday, April 20, 2012

निरंतर कह रहा .......: नींद मानो रूठ कर बैठ गयी

निरंतर कह रहा .......: नींद मानो रूठ कर बैठ गयी: रात नींद को बुलाता रहा करवटें बदलता रहा पर   नींद मानो   रूठ कर बैठ गयी , बहुत कशमकश और मिन्नतों के बाद भी नहीं आयी जब आयी तो मुझे पता ही...

निरंतर कह रहा .......: मेरे ह्रदय के रक्त का रंग कैसा है

निरंतर कह रहा .......: मेरे ह्रदय के रक्त का रंग कैसा है: जानना चाहता था मेरे ह्रदय के रक्त का रंग कैसा है छुरी हाथ में लेकर उसे चीर दिया देखा तो पाया रक्त आधा लाल आधा काला था समझ गया काला रक्त घ...

निरंतर कह रहा .......: मन की कशमकश

निरंतर कह रहा .......: मन की कशमकश: मैं सोचता रहता हूँ मन की कशमकश कह नहीं पाता तुम भी सोचती रहती हो कह नहीं पाती हो हमारी खामोशी  बीच की  दूरियां बढ़ा रही है ना कहने की मजबू...

Thursday, April 19, 2012

निरंतर कह रहा .......: खूबसूरत आवरण

निरंतर कह रहा .......: खूबसूरत आवरण: किताबों की दूकान में घुसते ही शो केस में लगी रंग बिरंगे खूबसूरत आवरण वाली किताब पर  नज़रें अटक गयी जब आवरण इतना खूबसूरत किताब भी  बहुद सुन्...

निरंतर कह रहा .......: क्यों बेफिक्र हो जाते हो ?

निरंतर कह रहा .......: क्यों बेफिक्र हो जाते हो ?: क्यों बेफिक्र हो जाते हो ? जब जब चलता है सब ठीक ठाक हँसते हो खिलखिलाकर भूल जाते हो आते हैं अवरोध सबके   जीवन में जब दिए हैं इश्वर ने आँखों...

"निरंतर" की कलम से.....: शक का प्यार में कोई स्थान नहीं होता

"निरंतर" की कलम से.....: शक का प्यार में कोई स्थान नहीं होता: सूरत और बातों से प्यार नहीं होता जिस्म की भूख मिटाना आँखों में आँखें डाल हाथ में हाथ पकड़ना इक दूजे को निहारना प्यार नहीं होता ...

Wednesday, April 18, 2012

निरंतर कह रहा .......: क्यों बेफिक्र हो जाते हो ?

निरंतर कह रहा .......: क्यों बेफिक्र हो जाते हो ?: क्यों बेफिक्र हो जाते हो ? जब जब चलता है सब ठीक ठाक हँसते हो खिलखिलाकर भूल जाते हो आते हैं अवरोध सबके   जीवन में जब दिए हैं इश्वर ने आँखों...

निरंतर कह रहा .......: कल का कल देखा जाएगा

निरंतर कह रहा .......: कल का कल देखा जाएगा: कभी सोचता आज कल जैसा ना हो कभी मन कहता आज जैसा कल ना हो जो आज सोचता कल नहीं सोचा था जो परसों सोचा था कल नहीं सोचा समझ नहीं आता हर दिन सोच...

निरंतर कह रहा .......: भीड़ के साथ भागता रहा

निरंतर कह रहा .......: भीड़ के साथ भागता रहा: निरंतर दौड़ता रहा भीड़ के साथ भागता रहा मन में व्यथित होता रहा जीवन आनंद ना ले सका धन वैभव को सब कुछ समझता रहा कितना सही कितना...

Tuesday, April 17, 2012

Nirantar's.......: When hope starts dying

Nirantar's.......: When hope starts dying: When hope starts dying Sadness arrives Confidence nosedives One feels weak and tired Thoughts become scary Life becomes boring One feels lo...

निरंतर कह रहा .......: आज इतना हँसो

निरंतर कह रहा .......: आज इतना हँसो: आज इतना हँसो कि हँसी तुमसे खुद पूछे तुम्हें हुआ क्या है ? क्या बात हुयी ऐसी  जो दिल इतना खुश है क्यूं छिपा कर रखा है ? मुझे भी बता दो वो रा...

निरंतर कह रहा .......: माँ की चिंता

निरंतर कह रहा .......: माँ की चिंता: सर्दी की रात थी घड़ी की सूइयां बारह बजा रही थी दोस्तों की महफ़िल सजी थी घर जाने की ज़ल्दी ना थी माँ बेसब्री से इंतज़ार करती होगी जानते हुयी...

निरंतर कह रहा .......: चाटुकारिता का तर्पण अर्पण

निरंतर कह रहा .......: चाटुकारिता का तर्पण अर्पण: जीवन में कष्ट और मृत्यु के भय से चाटुकारिता का तर्पण अर्पण इश्वर को याद करना व्यर्थ है इश्वर को पाना है तो उसे मन में बसाओ कथनी करनी में वि...

निरंतर कह रहा .......: क्या यह प्यार नहीं है ?

निरंतर कह रहा .......: क्या यह प्यार नहीं है ?: कैसे कह दिया तुमने ? मैं तुम्हें प्यार नहीं करता तुम्हें गले नहीं लगाता तुम्हें चूमता नहीं हूँ अपनी बाहों में नहीं लेता तुम्हारे करीब नहीं...

निरंतर कह रहा .......: शांती भी नतमस्तक हो जायेगी

निरंतर कह रहा .......: शांती भी नतमस्तक हो जायेगी: किसी ने कहा मुझसे जब अपनों को अपनाओगे शान्ति वहीँ पा जाओगे कितना भ्रम है मन को खुश रखने का साधन है किस को मिली है शांती  जो तुम्हें मिल जाय...

निरंतर कह रहा .......: आओ ज़िन्दगी के सांवले चेहरे को निखारा जाए

निरंतर कह रहा .......: आओ ज़िन्दगी के सांवले चेहरे को निखारा जाए: आओ ज़िन्दगी के सांवले चेहरे को निखारा जाए क्यों अमावस की रात में चाँद उगाया जाए भूखे को रोटी प्यासे को पाना पिलाया जाए पड़ोसी के साथ मिल कर...

निरंतर कह रहा .......: मैंने चाँद से पूछा,आकाश कितना बड़ा है

निरंतर कह रहा .......: मैंने चाँद से पूछा,आकाश कितना बड़ा है: मैंने चाँद से पूछा आकाश कितना बड़ा है चाँद बोला पता नहीं मैंने भी सूरज से पूछा था उसने भी यही कहा मुझे पता नहीं नन्ही चिड़िया ने वार्तालाप...

निरंतर कह रहा .......: नए को जानने से पहले

निरंतर कह रहा .......: नए को जानने से पहले: जिन्हें कल जानता था उनमें से कुछ याद रहे कुछ को भूल गया आज तक नहीं जानता था जिन्हें कल जानूंगा उन्हें कुछ याद रहेंगे कुछ को भूल जाऊंगा कैस...

Friday, April 13, 2012

घमंड


घमंड मनुष्य के व्यक्तित्व का
अभिन्न अंग है
किसी में अधिक किसी में कम
पर इसका स्तर
व्यक्ति के सोच पर निर्भर है
दूसरों के प्रति असम्मान नहीं हो ,
किसी को व्यथित नहीं करे,
स्वयं को मानसिक,
शररीरिक हानी नहीं हो
तो थोड़ा घमंड
विशेष कर अगर सिद्धांत को 
लेकर हो
तो अनुचित नहीं मानता
कई बार सिद्धान्वादी 
लोगों को भी
लोग घमंडी कहते हैं
प्रभुता महत्त्व,और पद पा कर 
मनुष्य
अवश्य ही गौरव का अनुभव 
करता है,
कई बार वह घमंड की 
सीमा तक पहुँच जाता है,
पर उसका सीमांकन भी
आसान नहीं है,
उचित और अनुचित में
बहुत महीन रेखा होती है
13-04-2012