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Tuesday, November 29, 2011

निरंतर कह रहा .......: इश्वर भक्ती में डूबा रहा

निरंतर कह रहा .......: इश्वर भक्ती में डूबा रहा: प्यासे को पानी नहीं पिलाया भूखे को भोजन नहीं कराया निरंतर इश्वर भक्ती में डूबा रहा स्वर्ग के सपने देखता रहा परमात्मा ने भक्ती का प्रसाद दिय...

मनोविकार


शरीर के विकार की
चिकित्सा दवा से होती है
मनोविकार की चिकित्सा
ध्यान,आत्म चिंतन
आत्म अन्वेषण
से होती है
29-11-2011-42
डा राजेंद्र तेला,"निरंतर

मानसिक शांती


जिस प्रकार
भरे हुए संदूक में
सामान रखने के लिए
कुछ सामान बाहर
निकालना पडेगा 
उसी प्रकार
मानसिक शांती के लिए
पुरानी बातों को
मष्तिष्क से बाहर
निकालना 
आवश्यक होता है
उन्हें भूलना पड़ता है
मन मष्तिष्क  को
शांत रखने के लिए
ध्यान करें
आत्म चिंतन और
आत्म अन्वेषण करें
परमात्मा में विश्वास रखें
समय सदा
एक सा नहीं रहता
मानसिक अशांती के
समय
मनपसंद कार्य में
मन लगाने का प्रयत्न करें
29-11-2011-41
डा राजेंद्र तेला,"निरंतर

Sunday, November 27, 2011

"निरंतर" की कलम से.....: राम -कृष्ण दोनों ने कहा

"निरंतर" की कलम से.....: राम -कृष्ण दोनों ने कहा: राम ने नहीं कहा मंदिर में बिठाओ मुझको कृष्ण ने नहीं कहा मंदिर में सजाओ मुझको राम -कृष्ण दोनों ने कहा निरंतर दिल में बसाओ हमको 2...

सहमती -असहमती


किसी प्रश्न के उत्तर में
या विषय पर
मौन रहना,सहमती माना जा
सकता है
असहमत हो तो,मौन ना रहे
अपने विचार
अवश्य प्रकट करने चाहिए
वो भी इस तरह से कि
जिससे आप सहमत ना हो
उसे बुरा नहीं लगे
27-11-2011-40
डा राजेंद्र तेला,"निरंतर

Saturday, November 26, 2011

भय और भ्रम


भय और भ्रम में
अधिक फर्क नहीं होता
दोनों मनुष्य के जीवन को
कंटकाकीर्ण कर देते हैं
जीवन भर चैन नहीं
लेने देते
26-11-2011-39
डा राजेंद्र तेला,"निरंतर

Friday, November 25, 2011

भूल सुधारना


शायद ही कोई होगा 
जिससे भूल नहीं होती 
पर भूल  सुधारना 
आवश्यक है 
चाहे खुद के
सुधारने से सुधरे 
या किसी के कहने से
सुधरे 
कई बार इंसान को 
समझ ही नहीं आता 
सुधार
कैसे किया जाए 
उस स्थिती में दूसरों की 
मदद लेना आवश्यक 
होता है 
सुधार करने के लिए
निरंतर खुले दिल से 
सुझाव लेने भी 
आवश्यक होते हैं 
उसमें परहेज़ नहीं 
रखना चाहिए
25-11-2011-38
डा राजेंद्र तेला,"निरंतर

Thursday, November 24, 2011

सीखना


कहते हैं
माँ के पेट से सीख कर
कोई नहीं आता
मनुष्य जो भी सीखता है ,
अनुभव से या दूसरों को देख कर
या फिर दूसरों द्वारा सिखाया जाता है
सीखना जीवन भर चलता रहता है ,
 एक अनपढ़ मजदूर  भी
हमें कुछ ना कुछ सिखा सकता है,
सीखने के लिए मस्तिष्क और ह्रदय के
कपाट खुले होने चाहिए
मेरा मानना है ,और बातों के अलावा
जीवन नियमित रूप से
सीखने की प्रक्रिया भी है
मनुष्य किसी से भी
सीख सकता है
सीखने के लिए उम्र ,धन,पद का
महत्त्व नहीं होता .
अहम् और अहंकार सीखने में
बाधक होता है
24-11-2011-37
डा राजेंद्र तेला,"निरंतर

Tuesday, November 22, 2011

जात,पात,धर्म,भाषा और प्रांत


जात,पात,धर्म,भाषा और प्रांत की बात पर 
विश्वास रखना
फिर आपस में प्रेम भाई चारे की बात करना ,
मिथ्या आशा और विचार है
22-11-2011-36
डा राजेंद्र तेला,"निरंतर

संयम



जीत का नशा
सर पर चढ़ता

हार का दुःख

दिल-ओ-दिमाग पर
असर करता
दोनों स्थितियों में
संयम रखना
आवश्यक होता

23-11-2011-35
डा राजेंद्र तेला,"निरंतर

आडम्बर


खुद के आडम्बर का

पता नहीं चलता

दूसरों का बुरा लगता

22-11-2011-33
डा राजेंद्र तेला,"निरंतर

इमानदारी


इमानदारी की बात करना आसान है

इमानदारी रखना बहुत कठिन है

22-11-2011-34
डा राजेंद्र तेला,"निरंतर

Sunday, November 20, 2011

"निरंतर" की कलम से.....: रेत के घरोंदे

"निरंतर" की कलम से.....: रेत के घरोंदे: बहुत समझाता था उसे सपनों पर विश्वास मत किया करो समुद्र किनारे रेत के घरोंदे मत बनाया करो कभी कोई तेज़ लहर आयेगी घर को बहायेगी अपने सपनों ...

हाँ सुनने की अपेक्षा


सदा हाँ सुनने की
अपेक्षा नहीं रखें
ना सुनने के लिए
भी तैयार रहे
ना सुनने पर
ना निराशा में
व्यथित हो
ना क्रोधित हो
20-11-2011-32
डा राजेंद्र तेला,"निरंतर

Friday, November 18, 2011

अधिकार


सबको अपनी बात कहने का अधिकार है 
मानना नहीं मानना आपका अधिकार है 
18-11-2011-31
डा राजेंद्र तेला,"निरंतर

अपेक्षा


 कम से कम अपेक्षा रखें  
अपेक्षा पूरी नहीं होने पर
दुःख और निराशा होती है 
जिससे क्रोध की उत्पत्ती होती है 
बिना अपेक्षा के मिलने पर 
खुशी दुगना होती है
18-11-2011-30
डा राजेंद्र तेला,"निरंतर

सलाह


सलाह 
सदा उचित देनी 
चाहिए 
कोई नहीं माने तो 
व्यथित नहीं होना 
चाहिए
समय आने पर 
जिसे सलाह दी गयी 
अवश्य याद करेगा
17-11-2011-29
डा राजेंद्र तेला,"निरंतर

Thursday, November 17, 2011

शक्ती



अपनी शक्ती को पहचानें 
उसके अनुरूप 
कार्य या व्यवहार करें 
जो दूसरों को अभिभूत करे 
अपनी कमज़ोरी को जाने 
उसके अनुरूप 
कार्य या व्यवहार ना करें 
असफलता मिलेगी 
अंग्रेज़ी भाषा में इसे कहूंगा 
Work according to your strength
Not according to your weakness
17-11-2011-28
डा राजेंद्र तेला,"निरंतर

Tuesday, November 15, 2011

विचारों का प्रवाह


विचारों का प्रवाह
मनुष्य के मष्तिष्क की
एक सामान्य प्रक्रिया है
पर सद विचार ही आयें,
उसके लिये सत्संग आवश्यक है .
सद विचार रखने वाले लोग
आपको निरंतर सद विचारों के प्रति
प्रोत्साहित करेंगे .
साथ ही विचारों के प्रवाह को
नियंत्रित करना भी अति आवश्यक है
अवांछनीय विचार मष्तिष्क में आते ही
उन्हें परिष्कृत करना भी सीखना चाहिए.
तत्काल कुछ और कार्य में अपने को
तल्लीन करना चाहिए
24-10-2011
1702-109-10-11-27
डा राजेंद्र तेला,"निरंतर

विश्वास


एक ऐसा शब्द जो हम निरंतर सुनते हैं ,
जिस के बिना मनुष्य का जीवन नहीं चलता,
विश्वास दो व्यक्तियों या व्यक्तियों के बीच
संबंधों की धुरी के सामान होता है.
संबंधों का बनना,बिगड़ना
परस्पर विश्वास पर ही निर्भर करता है.
विश्वास नहीं होता तो विश्वासघात भी नहीं होता .
ध्यान रखने योग्य प्रमुख बात है,
विश्वास कभी एक पक्षीय नहीं हो सकता.
सदा द्वीपक्षीय होता है.
विश्वास पाने के लिए विश्वास करना भी
उतना ही आवश्यक है,
साथ ही मर्यादाहीन,
अवांछनीय कार्यों और व्यवहार के लिए
किसी से विश्वास की अपेक्षा करना,
निरर्थक होता है.
डा राजेंद्र तेला,"निरंतर
25-10-2011-26

धन और गुण


धन से अच्‍छे गुण नहीं मिलते,
धन अच्‍छे गुणों से मिलता है !
-सुकरात
महान दार्शनिक सुकरात के समय में यह कथन उचित रहा होगा .
आज के समय में मेरा मानना है 
धन का सम्बन्ध अच्छे  गुणों से नहीं होता ,
वरन धन आज के समय में 
अधिकतर अवांछनीय तरीकों से कमाया जाता है 
या कहिये धन कमाने का व्यक्ती के गुणों  से कोई सम्बन्ध नहीं होता
अच्छे गुण किसी भी धन से अधिक होते हैं
08-11-2011
1759-27-11-11-25
डा राजेंद्र तेला,"निरंतर

स्त्री बल


अधिकतर पुरुष वर्ग समझता है,
स्त्रियाँ निर्बल होती हैं,
वास्तविकता इसके विपरीत है,
शारीरिक बल स्त्रियों का कम हो सकता है
पर आत्मिक बल अधिक होता है,
सहने और करने की शक्ती भी अधिक होती है,
जो त्याग और बलिदान स्त्रियाँ करती हैं ,
उसकी अनदेखी होती रही है.
दुःख है की,पुरुष प्रधान समाज
इस कटु सत्य को नज़रंदाज़ करता रहा है.
08-11-2011
1760-28-11-11-24
डा राजेंद्र तेला,"निरंतर

सच्चा ज्ञान क्या है ?


ग्रंथों में एवं महापुरुषों ने जो कहा पढ़ कर ,
अथवा अपने अनुभव और विवेक के अनुसार सच्चे ज्ञान पर
अपने विचार प्रकट करना आसान लगता है
मनुष्य समझता है उसे सच्चे ज्ञान का पता चल गया .
लेकिन प्रश्न है ,कौन तय करता है ,सच्चा ज्ञान क्या है ?
संभवतनिश्छल,निर्विकार,निष्पक्ष,निष्कपट जीवन जीने से,
परमात्मा में आस्था रखने एवं उसके मार्ग पर चलने से ही
सच्चे ज्ञान का अनुभव होता होगा.
08-11-2011
1761-29-11-11-23
डा राजेंद्र तेला,"निरंतर

पूजा-अर्चना


संसार का सृजन करने वाले  एवं उसे चलाने वाले परमात्मा को भिन्न नामों से पुकारा जाता है अपनी अपनी आस्था और धर्म के अनुसार  राम ,कृष्ण,शिव,जीसस क्राइस्ट,पैगम्बर मोहम्मद,गुरु नानक,गौतम बुद्ध ,महावीर ,जोराष्ट्र ,भिन्न भिन्न सम्प्रादायों के गुरुओं आदि के नामों से धर्मावलम्बी उन्हें याद करते उनका नमन व् अपने धार्मिक मूल्यों एवं आस्था के अनुसार
उनकी पूजा करते हैं एवं सम्मान प्रकट करते है
पर पूजा,अर्चना अर्थ हीन हो जाती है अगर हम उनके बताये रास्ते पर नहीं चलते .
हमारे कार्य कलापों एवं व्यवहार में उनके द्वारा दी गयी शिक्षा अगर परिलक्षित नहीं होती हो तो ये अधर्म कहलायेगा
अपने ईश या इष्ट को प्रसन्न करने के लिए पूजा ,अर्चना से अधिक आवश्यक है,उनके द्वारा स्थापित मूल्यों एवं सत्य मार्ग पर चलना .
अन्यथा पूजा,म्रत्यु और अनहोनी से बचने के लिए  उन्हें याद करने से अधिक नहीं होती है.
मात्र दिखावा भर रह जाती है और स्वयं को धोखा देने के सामान होती है
संसार का सृजन करने वाले एवं उसे चलाने वाला परमात्मा अगर है ,तो ध्यान रहना चाहिए वो सब देखता है
ऐसा कार्य या व्यवहार जो उसे मान्य नहीं है ,उसकी दृष्टि से छुपा नहीं रहता
15-11-2011-22
डा राजेंद्र तेला,"निरंतर